हीरे के लालच में फंसा एक आदमी और सामने आया सिर कटा भूत – Horror Story in Hindi
दिसंबर की ठंडी रात थी। घड़ी में करीब साढ़े दस बजे थे। सड़क लगभग सुनसान थी और ठंडी हवा पेड़ों को जोर-जोर से हिला रही थी।
मयंक एक मल्टीनेशनल कंपनी में ब्रांच मैनेजर था। उस दिन ऑफिस में बहुत काम होने के कारण उसे घर जाने में देर हो गई थी।
वह अपनी बाइक से घर की ओर जा रहा था। सड़क के दोनों तरफ घना जंगल था। उस सुनसान रास्ते से गुजरते हुए उसके मन में अजीब सा डर भी महसूस हो रहा था।
अचानक… एक आवाज सुनाई दी।
“रुक जाओ…”
मयंक वहीं पर ही रुक गया और पीछे मुड़ के देखा। लेकिन पीछे कोई भी नहीं था।
उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। तभी फिर वही आवाज आई।
“सामने देखो…”
जैसे ही मयंक ने सामने देखा तो उसे जमीन पर कुछ चमकती हुई चीज दिखाई दी। मयंक दौड के उस चीज के पास गया और देखा तो यह कोई साधारण चीज नहीं थी बल्कि एक चमकता हुआ हीरा था।
“इतना बड़ा हीरा…!” उसने हैरानी से कहा।
उसने वह हीरा अपने हाथ में लिया। उसकी चमक देख कर मयंक की खुशी का पार ना रहा। लेकिन मयंक को कहां पता था यह कोई साधारण है या नहीं बल्कि एक मायावी हीरा है।
उस हीरे के अंदर से एक डरावनी आवाज आई। “अगर तुम्हें और हीरे चाहिए… तो इस जमीन को खोदो… इस जमीन के नीचे बहुत सारे हीरे छुपे हुए हैं…”
मयंक खुश हो गया उसने उस हीरे को अपनी जेब में डाला और जमीन खोदना शुरू किया।
करीबन 2 फीट खोद-काम करने के बाद अचानक मयंक डर के मारे चिल्लाने लगा। इसके कारण उसका संतुलन खो गया और जमीन पर गिर पड़ा।
क्योंकि उस गड्ढे में से हीरे मोती नहीं बल्कि किसी इंसान का कटा हुआ सर मिला। अचानक वह सर हवा में उड़ने लगा और बोला, “डरो मत मैं तुम्हें कोई हानि नहीं पहुंचा गा।”
मयंक डर के मारे कांप रहा था।
सिर बोला— मैं तुम्हें बहुत सारे हीरे झवेरात भी दूंगा। बस मेरी बात ध्यान से सुनो मैं जहां जाता हूं वहां मेरे पीछे आओ।
धीरे-धीरे वह कटा हुआ सिर हवा में उठने लगा। उसकी आंखें लाल चमकने लगीं।
करीबन 1 किलोमीटर चलने के बाद वह सिर रुक गया। मयंक भी रुक गया।
सिर ने जमीन की ओर इशारा किया। “यहाँ खोदो…”
मयंक ने कांपते हाथों से फिर जमीन खोदनी शुरू की।
मयंक खुश हो गया और उस जमीन को खोदना शुरू कर दिया। खोद ते खोद ते उस जमीन के नीचे हीरा मोती तो नही मिले बल्कि उस सिर का कटा हुआ धड़ मिला।
सिर बोला—
“अब आखिरी काम बाकी है…”
“क… कौन सा काम?” मयंक ने कांपते हुए पूछा।
“मुझे एक लोटा खून चाहिए…”
मयंक के पैरों तले जमीन खिसक गई। “मैं खून कहाँ से लाऊं?”
तभी सिर बोला—
“देखो… वहाँ एक आदमी जा रहा है…” सड़क पर दूर एक आदमी चलता हुआ दिखाई दे रहा था।
सिर ने कहा—
“उसे मार दो… और उसका खून ले आओ…”
मयंक डर गया। “नहीं…नहीं… मैं किसी को नहीं मार सकता!”
सिर की आंखें अचानक लाल हो गईं। उस सिर ने अपने तंत्र मंत्र की शक्ति से एक छुरी ओर लोटा प्रगट किया।
उसने गुस्से में कहा—
“अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी… तो मैं तुम्हारे पूरे परिवार को मार दूंगा!”
मयंक ने मजबूरी में आकर उस आदमी को मार डाला और उसका खून ले कर उस सिर के पास गया।
वो सिर खून को देखकर बहोत खुश हुआ और बोला, “यह खून मेरे शरीर पे डाल दे।”
उस सिर के कहने पर मयंक ने खून को उसके शरीर पे डाल दिया। फिर कुछ ही देर में वो कटा हुआ सिर उस शरीर पे जुड़ गया।
यह सब देख कर मयंक की हालत अब खराब होने लगी। वो उस भूत को देख कर काफी डर गया।
जैसे ही वो भूत जिंदा हुआ तो जोर जोर से हँस ने लगा ओर डरावनी आवाज में बोला, “तुमने बहोत बड़ी गलती कर दी की तुम्हें मुजे फिर से जिंदा कर दिया।”
अब मैं सिर्फ तुम्हे ही नही बल्कि इस पूरे शहर को मौत के गाढ़ उतार दूंगा।
डर के मारे मयंक के मुँह से आवाज भी नही निकल रही थी। मयंक जान बचाने के लिए भागने लगा।
लेकिन अचानक वह भूत हवा में छलांग लगाकर उसके सामने आ गया। उसने मयंक को जमीन पर गिरा दिया।
भूत बोला—
“मुझे बहुत भूख लगी है… सबसे पहले मैं तुम्हारा मांस खाऊंगा…”
जैसे ही भूत मयंक पर झपटा… अचानक…
छन्न!!!
भूत का सिर उसके शरीर से अलग होकर जमीन पर गिर गया।
मयंक समझ नही पाया कि आखिर यह चमतकार हुआ कैसे?
जब मयंक ने पीछे मुड़ कर देखा तो एक अगोरी बाबा खड़े थे।
उस अगोरी बाबा ने कहा, “जब तुम उस आदमी को मारकर उसका खून ले जा रहे थे तभी मेने देख लिया था। ओर समझ गया कोई दुष्ट आत्मा फिर से जीवित होने वाली है।”
इसी लिए मैं तुम्हारे पीछे पीछे यहाँ तक चला आया। और मेने अपनी मंत्र की शक्ति से उस भूत को फिर से मार दिया।
अब तुम निचित हो कर अपने घर जाओ। अब तुम पर कई खतरा नही है।
आज भी मयंक उस बात को याद करता है तो उसकी रूह तक कांप उठती है।
दोस्तो आपको यह कहानी कैसी लगी प्लीज़ हमे कमेंट कर के जरूर बताए।
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